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ख़्वाजा उ़स्मान हारूनी या हरवनी

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*🥀 ख़्वाजा उ़स्मान हारूनी या हरवनी 🥀*



ह़ुज़ूर ख़्वाजा ग़रीब नवाज़, ख़्वाजा मुई़नुद्दीन ह़सन चिश्ती अजमेरी رضی الله عنہ के पीरो मुर्शिदे, ह़ज़रते सय्यिदुना ख़्वाजा उ़स्मान رضی الله عنہ की विलादत मुल्के ख़ुरासान के *क़स़्बए हरवन* में हुई, इसी निस्बत से आप हरवनी कहलाते हैं, जब्कि बहुत से लोग आपके नाम के साथ *हरवनी* की जगह *हारूनी* लिखते और बोलते हैं, ह़ालांकि तह़क़ीक़ी एअ़्तिबार से येह दुरुस्त नहीं - इस ह़क़ीक़त की स़राह़त *ह़ुज़ूर फ़ैज़े मिल्लत, ह़ज़रत अ़ल्लामह मुफ़्ती फ़ैज़ अह़मद उवैसी रज़वी* رحمۃ الله علیہ ने *शरह़े अख़्बारुल अख़्यार* के स़फ़्ह़ह् 86 के *ह़ाशियह* में फ़रमाई है।

ह़ज़रत अ़ल्लामह क़ारी *लुक़मान शाहिद* स़ाह़ब क़िब्लह *तह़रीराते लुक़मान* के स़फ़्ह़ह नम्बर 522 व 523 पर *शरह़े अख़्बारुल अख़्यार* ही के ह़वाले से लिखते हैं:

ह़ुज़ूर ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ मुई़नुद्दीन अजमेरी رضی الله عنہ के मुर्शिदे गिरामी, ख़्वाजा उ़स्मान رضی الله عنہ के मुतअ़ल्लिक़ फ़ैज़े मिल्लत मुफ़्ती फ़ैज़ अह़मद उवैसी रज़वी قدس سرہ कहते हैं:
ह़ज़रत उ़स्मान हरवनी मुल्के ख़ुरासान के क़स़्बह हरवन में पैदा हुए ..... हरवनी को लोग हारूनी कहते हैं जो बिल्कुल ग़लत़ है

*📚 ह़शियह: शरह़े अख़बारुल अख़यार मुतर्जम, त़ब्क़ह अव्वल, पेज 86, ज़ावियह पब्लिशर्ज़ लाहौर - रज़ा दारुल इशाअ़त बरेली शरीफ़, जीलानी बुक डिपो दिल्ली 6*



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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*

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मुई़नुद्दीन ह़सन सन्जरी या सिज्ज़ी

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 मुई़नुद्दीन ह़सन सन्जरी या सिज्ज़ी 🥀* _ह़ुज़ूर ख़्वाजा ग़रीब नवाज़, ख़्वाजा मुई़नुद्दीन चिश्ती अजमेरी رضی الله عنہ का इस्मे मुबारक *ह़सन* है, और आप का अस़्ल निस्बती लक़ब *“सिज्ज़ी”* है, न कि अ़वाम में राइज *“सन्ज़री”* - इसकी वजह येह है कि आप का तअ़ल्लुक़ इ़लाक़ह *“सिज्ज़”* से था, जो कि सिजिस्तान का मुख़्तस़र और सीस्तान का मुअ़र्रब है, और क़वाइ़दे अ़रबी के मुत़ाबिक़ इस की निस्बत *सिज्ज़ी* बनती है। मोअ़्तबर कुतुबे तारीख़ व तज़्किरह, जैसे मनाक़िबुल् ह़बीब, तहज़ीबुल् अस्मा वल् लुग़ात और मुअ़्जमुुल् बुलदान में स़राह़त के साथ सीन पर ज़ेर, जीम साकिन और आख़िर में नुक़्त़ह् दार ज़ (राए मुअ़ज्जमह) का ज़िक्र है। - *लिहाज़ा “सन्जरी” कहना या लिखना तह़क़ीक़ी त़ौर पर ग़लत़ है, और दुरुस्त “सिज्ज़ी” ही है।*_ *ह़ज़रत अ़ल्लामह क़ारी लुक़मान शाहिद स़ाह़ब क़िब्लह तह़रीराते लुक़मान के स़फ़्ह़ह नम्बर 523 पर लिखते हैं:* हिन्दुस्तान के मशहूर स़ूफ़ी बुज़ुर्ग ह़ज़रते ख़्वाजा मुई़नुद्दीन चिश्ती अजमेरी علیہ الرحمہ का नामे पाक ह़सन है, और अ़वाम व ख़वास़ आप को ह़सन सन्जरी कहते, लिखते हैं - आप...