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*🥀 मुई़नुद्दीन ह़सन सन्जरी या सिज्ज़ी 🥀*
_ह़ुज़ूर ख़्वाजा ग़रीब नवाज़, ख़्वाजा मुई़नुद्दीन चिश्ती अजमेरी رضی الله عنہ का इस्मे मुबारक *ह़सन* है, और आप का अस़्ल निस्बती लक़ब *“सिज्ज़ी”* है, न कि अ़वाम में राइज *“सन्ज़री”* - इसकी वजह येह है कि आप का तअ़ल्लुक़ इ़लाक़ह *“सिज्ज़”* से था, जो कि सिजिस्तान का मुख़्तस़र और सीस्तान का मुअ़र्रब है, और क़वाइ़दे अ़रबी के मुत़ाबिक़ इस की निस्बत *सिज्ज़ी* बनती है। मोअ़्तबर कुतुबे तारीख़ व तज़्किरह, जैसे मनाक़िबुल् ह़बीब, तहज़ीबुल् अस्मा वल् लुग़ात और मुअ़्जमुुल् बुलदान में स़राह़त के साथ सीन पर ज़ेर, जीम साकिन और आख़िर में नुक़्त़ह् दार ज़ (राए मुअ़ज्जमह) का ज़िक्र है। - *लिहाज़ा “सन्जरी” कहना या लिखना तह़क़ीक़ी त़ौर पर ग़लत़ है, और दुरुस्त “सिज्ज़ी” ही है।*_
*ह़ज़रत अ़ल्लामह क़ारी लुक़मान शाहिद स़ाह़ब क़िब्लह तह़रीराते लुक़मान के स़फ़्ह़ह नम्बर 523 पर लिखते हैं:*
हिन्दुस्तान के मशहूर स़ूफ़ी बुज़ुर्ग ह़ज़रते ख़्वाजा मुई़नुद्दीन चिश्ती अजमेरी علیہ الرحمہ का नामे पाक ह़सन है, और अ़वाम व ख़वास़ आप को ह़सन सन्जरी कहते, लिखते हैं -
आप को सन्जरी कहना, लिखना दुरुस्त नहीं; अस़्ल लफ़्ज़ सिज्ज़ (سِ جۡ ز) है, जिसके साथ या-ए निस्बती लगाने से सिज्ज़ी (سِجۡزِیۡ) बना
इसकी वजह येह है कि आप علیہ الرحمہ का तअ़ल्लुक़ इ़लाक़ह सिज्ज़ से था, जो कि सिजिस्तान का मुख़फ़्फ़फ़ और सीस्तान का मुअ़र्रब है देखिए
*📚 मनाक़िबुल ह़बीब मुतर्जम, ह़ाजी ख़्वाजह नज्मुद्दीन, 1287 हिज्री, पेज 51 दारुल इस्लाम लाहौर*
*एक बात याद रहे कि:*
मनाक़िबुल ह़बीब का कुछ माह पहले दारुल इस्लाम से तर्जुमह छपा है, जिस में लफ़्ज़े सिज्ज़ (سِجۡز) को कातिब ने सन्जर (سَنۡجَرۡ) कर दिया है, जो कि ग़लत़ है ह़ज़रते मुस़न्निफ़ قدس سرہ ने बा-क़ाइ़दह इस का तलफ़्फ़ुज़ इन अल्फ़ाज़ में लिखा है सीन मुहमलह (वोह ह़रफ़ जिस पर नुक़्त़ह न हो) की कसरह (ज़ेर की ह़रकत), जीम के सुकून और राए मुअ़्जमह (वोह ह़रफ़ जिस पर नुक़्त़ह हो) - पेज 51
मुस़न्निफ़ (लेखक) ने राए मुअ़्जमह, नुक़्त़े वाले ज़ को कहा है जिसे कातिब र समझता रहा
इस इ़लाक़े से मन्सूब को सन्जरी (سَنۡجَرِیۡ) कहना बिल्कुल ग़लत़ है, दुरुस्त सिज्ज़ी (سِجۡزِیۡ) है -
*ह़ाफ़िज़ अबू बक्र ह़ाज़िमी कहते हैं:*
सिज्ज़, सिजिस्तान का नाम है, जिस से मन्सूब सिज्ज़ी कहलाता है
*📚انظر: تھذیب الاسماء واللغات، امام نووی، فصل فی اسماء المواضع، ج:3، ص:159، دار الکتب العلمیہ بیروت*
*सिक़ह मुअर्रिख़ अ़ल्लामह याक़ूत ह़ुमवी 626 हिज्री कहते हैं:*
सिज्ज़ के सीन पर ज़ेर, जीम साकिन और आख़िर में ज़ है ... इस से मन्सूब सिज्ज़ी कहलाता है
*📚 معجم البلدان، ج:3، ص:189، دار صادر بیروت*
*लिहाज़ा आप का नामे पाक हुवा:*
ख़्वाजा मुई़नुद्दीन ह़सन सिज्ज़ी نور الله مرقدہ
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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