Skip to main content

सुल्त़ानुल हिंद ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ का तआ़रुफ़

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴



*🥀 सुल्त़ानुल हिंद ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ का तआ़रुफ़ 🥀*



अ़त़ाए रसूल, सुल्त़ानुल हिन्द, ख़्वाजा ख़्वाजगाने चिश्त, ख़्वाजा ग़रीब नवाज़, ख़्वाजा मुई़नुद्दीन ह़सन चिश्ती अजमेरी رضی الله تعالٰی عنہ का अस़्ल नाम ह़सन है और लक़ब मुई़नुद्दीन व ग़रीब नवाज़ है।

*ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के वालिदैन:*
आपके वालिद सय्यिद ग़यासुद्दीन हैं, और वालिदह बीबी उम्मुल वरअ़् अल्-मअ़्रूफ़ माहे नूर हैं। رضی الله عنہما -

👉 आप علیہ الرحمہ ह़ाफ़िज़े क़ुरआन थे -
👉 आप के उस्ताद ह़ुसामुद्दीन बुख़ारी और मुह़म्मद बुख़ारी हैं - رضی الله عنہما

आप ने दो शादियाँ कीं, कुल तीन बेटे और एक बेटी पैदा हुईं - बेटे: ख़्वाजा फ़ख़रुद्दीन, ख़्वाजा ज़ियाउद्दीन अबू सई़द, ख़्वाजा ह़ुसामुद्दीन हैं और बेटी बीबी ह़ाफ़िज़ह जमाल हैं। رضی الله تعالٰی عنہم

👉 आपके कई पीर भाई हिन्दुस्तान में मौजूद हैं।
👉 आप के पड़-पोते ख़्वाजा मुई़नुद्दीन ख़ुर्द बिन ख़्वाजा ह़ुसामुद्दीन सोख़्तह की औलाद मालवह आई थी।
👉 हिन्द में आप के मामूं ज़ाद भाई और एक भांजे का भी ज़िक्र मिलता है 

*सिल्सिलए चिश्तियह की शाख़ें:*
👉 सिल्सिलए चिश्तियह कम व बेश पच्चीस से ज़ाइद शाख़ों में तक़सीम है जैसे, फ़रीदियह, निज़ामियह, स़ाबिरियह, फ़ख़रियह, अशरफ़ियह, और सिराजियह वग़ैरह।

👉 ख़्वाजा अबू मुह़म्मद चिश्ती से लेकर ख़्वाजा नस़ीरुद्दीन चराग़ देहली तक, हर एक ने अपनी औलाद के बजाए अपने ख़ुलफ़ा में जिसे ज़्यादह अहल जाना उसे सज्जादह नशीन बनाया ।।

*ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ ह़नफ़ी थे:*
👉 सरकारे ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ رضی الله عنہ ह़नफ़िय्युल मस्लक थे, बल्कि अकसर मशाइख़े चिश्त ह़नफ़ी थे दर्जे ज़ैल किताबें आप के पेशे नज़र रहीं: हिदायह, फ़तावा ज़हीरियह, रौज़ह इमाम यह़या ज़िन्दवेसी, फ़िक़्हे अकबर, स़लाते मस्ऊ़दी और ख़्वाजह अबुल्लैस समरक़न्दी की तफ़सीर वग़ैरह जिस से अ़यां होता है कि आप ह़नफ़ी थे और आप के पीर व मुर्शिद भी ह़नफ़ी ही थे (माख़ूज़ ग़रीब नवाज़ का फ़िक़्ही मज़हब, अज़ सिराजुल फ़ुक़हा)

*विस़ाल: 6 रजबुल मुरज्जब 633 हिज्री*
*अजमेर ए मुअ़ल्ला, हिन्द में विस़ाल हुवा*

  

👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑
*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*

Comments

Popular posts from this blog

मुई़नुद्दीन ह़सन सन्जरी या सिज्ज़ी

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 मुई़नुद्दीन ह़सन सन्जरी या सिज्ज़ी 🥀* _ह़ुज़ूर ख़्वाजा ग़रीब नवाज़, ख़्वाजा मुई़नुद्दीन चिश्ती अजमेरी رضی الله عنہ का इस्मे मुबारक *ह़सन* है, और आप का अस़्ल निस्बती लक़ब *“सिज्ज़ी”* है, न कि अ़वाम में राइज *“सन्ज़री”* - इसकी वजह येह है कि आप का तअ़ल्लुक़ इ़लाक़ह *“सिज्ज़”* से था, जो कि सिजिस्तान का मुख़्तस़र और सीस्तान का मुअ़र्रब है, और क़वाइ़दे अ़रबी के मुत़ाबिक़ इस की निस्बत *सिज्ज़ी* बनती है। मोअ़्तबर कुतुबे तारीख़ व तज़्किरह, जैसे मनाक़िबुल् ह़बीब, तहज़ीबुल् अस्मा वल् लुग़ात और मुअ़्जमुुल् बुलदान में स़राह़त के साथ सीन पर ज़ेर, जीम साकिन और आख़िर में नुक़्त़ह् दार ज़ (राए मुअ़ज्जमह) का ज़िक्र है। - *लिहाज़ा “सन्जरी” कहना या लिखना तह़क़ीक़ी त़ौर पर ग़लत़ है, और दुरुस्त “सिज्ज़ी” ही है।*_ *ह़ज़रत अ़ल्लामह क़ारी लुक़मान शाहिद स़ाह़ब क़िब्लह तह़रीराते लुक़मान के स़फ़्ह़ह नम्बर 523 पर लिखते हैं:* हिन्दुस्तान के मशहूर स़ूफ़ी बुज़ुर्ग ह़ज़रते ख़्वाजा मुई़नुद्दीन चिश्ती अजमेरी علیہ الرحمہ का नामे पाक ह़सन है, और अ़वाम व ख़वास़ आप को ह़सन सन्जरी कहते, लिखते हैं - आप...