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चिश्ती कहलाने की वजह, शजरए त़रीक़त और ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के ख़ुलफ़ा

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*🥀 चिश्ती कहलाने की वजह, शजरए त़रीक़त और ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के ख़ुलफ़ा 🥀*



*चिश्ती कहलाने की वजह:*
येह ख़याल ग़लत़ है कि चिश्ती सिल्सिलह ह़ज़रत ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ (علیہ الرحمہ) से शुरूअ़् हुवा बल्कि इसकी इब्तिदा ह़ज़रते ख़्वाजा अबू इसह़ाक़ (علیہ الرحمہ) से हुई, मब्दा व मंशा चिश्तियां ह़ज़रत ख़्वाजा अबू इसह़ाक़ शामी (علیہ الرحمہ) जब बक़स़्दे ह़ुस़ूले बैअ़त ख़्वाजा मुमशाद उ़लू दीनवरी के यहाँ बग़दाद में ह़ाज़िर हुए और शरफ़े बैअ़त व इरादत से मुशर्रफ़ हुए तो ह़ज़रत ख़्वाजा मुमशाद उ़लू दीनवरी علیہ الرحمہ ने दर्याफ़्त फ़रमाया “तेरा नाम क्या है” अ़र्ज़ किया इस आ़जिज़ को अबू इसह़ाक़ शामी कहते हैं आप ने फ़रमाया आज से हम तुझ को अबू इसह़ाक़ चिश्ती कहेंगे और जो तेरे सिल्सिलए इरादत में ता क़यामे क़यामत दाख़िल होगा वोह भी चिश्ती कहलाएगा पस ह़ज़रत ख़्वाजा अबू इसह़ाक़ शामी ह़स्बे फ़रमाने मुर्शिदे चिश्त (शाक़िलान जो हिरात से तीस कोस है) में तशरीफ़ लाए और रुश्दो हिदायत में मस़रूफ़ हुए आप के सिलसिलह के बुज़ुरगों में से ह़ज़रत ख़्वाजा अबू अह़मद चिश्ती, ह़ज़रत ख़्वाजा मुह़म्मद चिश्ती, ह़ज़रत ख़्वाजा अबू यूसुफ़ चिश्ती और ह़ज़रत ख़्वाजा क़ुत़बुद्दीन मौदूद चिश्ती भी चिश्त में क़याम पज़ीर होकर मदफ़ून हुए ब-ईं वजह येह सिल्सिलह चिश्ती के नाम से मशहूर हुवा चूँकि मज़कूरह बाला ह़ज़रात ह़ुज़ूर ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के पीराने सिल्सिलह हैं इस लिए ह़ज़रत ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ भी चिश्ती कहलाए 
*📚 ह़याते सुलत़ानुल हिन्द ख़्वाजह ग़रीब नवाज़, पेज 20*

*शजरए त़रीक़त:*
ह़ज़रत ख़्वाजा मुई़नुद्दीन चिश्ती मुरीद ह़ज़रत ख़्वाजा उ़स्मान हारवनी चिश्ती मुरीद ह़ज़रत शरीफ़ ज़न्दनी मुरीद ह़ज़रत ख़्वाजा क़ुत़बुद्दीन चिश्ती मुरीद ह़ज़रत ख़्वाजा नास़िरुद्दीन अबू यूसुफ़ चिश्ती मुरीद ह़ज़रत ख़्वाजा अबू अह़मद अब्दाल चिश्ती मुरीद ह़ज़रत ख़्वाजा अबू इसह़ाक़ चिश्ती मुरीद ह़ज़रत ख़्वाजा मुमशाद उ़लू दीनवरी मुरीद ह़ज़रत शैख़ अमीनुद्दीन बस़री मुरीद ह़ज़रत सदीदुद्दीन ह़ुज़ैफ़ह मरअ़शी मुरीद ह़ज़रत सुलत़ान इब्राहीम बिन अदहम बल्ख़ी मुरीद ह़ज़रत फ़ुज़ैल बिन अ़याज़ मुरीद ह़ज़रत ख़्वाजा अ़ब्दुल वाह़िद बिन ज़ैद मुरीद ह़ज़रत ख़्वाजा ह़सन बस़री मुरीद इमामुल औलिया सय्यिदुना अ़लिय्ये मुरतज़ा رضی الله عنہم اجمعین 
*📚 ह़याते सुलत़ानुल हिन्द ख़्वाजह ग़रीब नवाज़, पेज 23*

*ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के ख़ुलफ़ा :*
ह़ज़रत सुलत़ानुल हिन्द ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ का विस़ाल 627 हिज्री में हुवा - आपके बअ़्द आपके जलीलुश्शान ख़ुलफ़ा व अहले इरादत ने मुल्क के त़ूल व अ़र्ज़ में इस्लाम की बिसात़ बिछाई - सियरुल अक़त़ाब के अन्दर ह़ज़रत के ख़ुलफ़ा की तअ़्दाद तेरह (13) बताई गई है मगर मुस़न्निफ़े ख़ज़ीनतुल अस़्फ़िया के बयान के मुत़ाबिक़ ह़ज़रत के इक्कीस (21) ख़ुलफ़ा हैं जिनके अस्मा ए गिरामी येह हैं: ❶ ह़ज़रत ख़्वाजा क़ुत़बुद्दीन बख़्तियार काकी (दिल्ली), ❷ ह़ज़रत शैख़ ह़मीदुद्दीन नागौरी (नागौर शरीफ़), ❸ ह़ज़रत ख़्वाजा फ़ख़रुद्दीन फ़रज़न्दे अर्जमन्द ह़ज़रत ख़्वाजा स़ाह़ब (सरवार शरीफ़), ❹ ह़ज़रत ख़्वाजा बुरहानुद्दीन उ़र्फ़ बदर (बदर शरीफ़) - ❺ ह़ज़रत शैख़ वजीहुद्दीन (हिरात), ❻ ह़ज़रत ख़्वाजा बुरहानुद्दीन उ़र्फ़ बदर (अजमेर शरीफ़), ❼ ह़ज़रत शैख़ अह़मद (अजमेर शरीफ़), ❽ ह़ज़रत शैख़ मुह़सिन, ❾ ह़ज़रत ख़्वाजा सुलैमान ग़ाज़ी, ❿ ह़ज़रत शैख़ शमसुद्दीन, ⓫ ह़ज़रत ख़्वाजा ह़सन ख़ियात़, ⓬ ह़ज़रत अ़ब्दुल्लाह (जिनका नाम जैपाल था), ⓭ ह़ज़रत शैख़ स़दरुद्दीन किरमानी, ⓮ ह़ज़रत बीबी ह़ाफ़िज़ह जमाल स़बिय्यह सई़दह (दुख़्तरे नेक) ह़ज़रते ख़्वाजा (अजमेर शरीफ़), ⓯ ह़ज़रत शैख़ मुह़म्मद तुर्क नारनौली (दिल्ली), ⓰ ह़ज़रत शैख़ अ़ली संजरी, ⓱ ह़ज़रत ख़्वाजा यादगार अ़ली सब्ज़दारी, ⓲ ह़ज़रत ख़्वाजा अ़ब्दुल्लाह बयाबानी, ⓳ ह़ज़रत शैख़ मता, ⓴ ह़ज़रत शैख़ वह़ीद, ㉑ ह़ज़रत शैख़ मस्ऊ़द ग़ाज़ी (वाज़ेह़ रहे कि येह ह़ज़रत सय्यिद सालार मस्ऊ़द ग़ाज़ी बहराइची के अ़लावह हैं) علیہم الرحمہ
*📚 ह़याते सुलत़ानुल हिन्द ख़्वाजह ग़रीब नवाज़, पेज 36*



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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*

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