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मज़ामीर (यानी म्यूज़िक) के साथ क़व्वाली गाना सुनना

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*🥀 मज़ामीर (यानी म्यूज़िक) के साथ क़व्वाली गाना सुनना 🥀*



*🔊 पोस्ट 4*

❣️ब‌अज़ ख़ानक़ाहीयो की ज़ुबानी ये भी सुना के हम क़व्वालियां इसलिए कराते हैं के ज्य़ादा लोग जमा हो जायें और उर्स भारी हो जाए, ये भी सख्त नादानी है गोया आपको अपनी नामोरी की फ़िक्र है आख़ीरत की फ़िक्र नहीं, आपको कोई जानता न हो आपके पास कोई बैठता न हो आप गुम नाम हों और हराम कारीयों से बचते हों नमाज़ों के पाबंद हों बीवी बच्चों के लिए हलाल रोज़ी कमाने में लगे हों
और आपका परवरदिगार आपसे राज़ी हो ये हज़ार दर्जे बेहतर है
इससे के आप मशहूर ए ज़माना शख़्सियत हों आपके हज़ारों मुरीद हों हर वक़्त हज़ारों म‌अतक़िदीन का झुमगटा लगा रहता हो या लाखों के मजमे में बोलने वाले ख़तीब व मुक़र्रिर हों
बड़े अल्लामा मौलाना शुमार किये जाते हों लेकिन हराम कारीयों में इनहिमाक नमाज़ों से ग़फलत
शोहरत व जाह तलबी, दौलत की नाजाइज़ हवस की वजह से मैदान ए महशर में ख़ुदा ए त‌आला के सामने शर्मिन्दगी हो
क़ियामत के दिन रुसवाई हो,

💖 मेरे भाईयो दिल में ये तमन्ना रखो और यही ख़ुदा ए क़दीर से दुआ किया करो के ख़्वाह हम मशहूर ए ज़माना पीर और दिलों में जगह बनाने वाले ख़तीब हों या न हों
लेकिन हमारा रब हमसे राज़ी हो जाए ईमान पे मौत हो जाए
और जन्नत नसीब हो जाए, ख़ुदा ए त‌आला चाहे हमें थोड़ोंं में रखे लेकिन अच्छों और सच्चों में रखे, फ़क़ीरी और दुर्वेशी भीड़ और मजमा जुटाने का काम नहीं है फ़क़ीर तो तन्हाई पसंद होते हैं
और भीड़ से भागने हैं अकेले में याद ए ख़ुदा करते हैं,

*उनकी याद उनका तसव्वुर है उन्हीं की बातें,*
*कितना आबाद मेरा गोशा ए तन्हाई है,*

🌹आखिर में एक बात ये भी बता देना ज़रूरी है के रसूलल्लाह सल्लललाहू तआला अलैही व सल्लम ने इरशाद फ़रमाया के जो कोई ख़िलाफ़ ए शराअ काम की बुनियाद डालता है तो उस पर अपना और सारे करने वालों का गुनाह होता है, 

👉 लिहाज़ा जो मज़ामीर (यानी म्यूज़िक) के साथ क़व्वालियां कराते हैं और दूसरों को भी इसका मौक़ा देते हैं उनपर अपना क़व्वालों और लाखों तमाशाईयों का गुनाह है मरते ही उन्हें अपने काम का अंजाम देखने को मिल जाएगा,
हमारी इस तहरीर को पढ़कर हमारे इस्लामी भाई बुरा न मानें
बल्के ठंडे दिल व दिमाग से सोचें अपनी और अपने भाईयों की इस्लाह की कोशिश करें,

🤲 अल्लाह त‌आला प्यारे मुस्तफा सल्लललाहू तआला अलैहि वसल्लम के सदक़े व तुफ़ैल तमाम मुसलमानों को तमाम गुनाहों से बचने और
शरीअत ए मुस्तफा सल्लललाहू तआला अलैहि वसल्लम पर अमल करने की तौफीक़ अता फरमाए अमीन बिजाही सय्यीदिल मुरसलीन सल्लललाहू तआला अलैहि वसल्लम,



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