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मज़ामीर (यानी म्यूज़िक) के साथ क़व्वाली गाना सुनना

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*🥀 मज़ामीर (यानी म्यूज़िक) के साथ क़व्वाली गाना सुनना 🥀*



*🔊 पोस्ट 2*

⭐ क़ुतबुल अक़ताब सय्यदना फरीद‌उद्दीन गंज शकर रहमातुल्लाहि तआला अलैह के मुरीद और सय्यदना महबूब ए इलाही हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया देहेलवी रहमातुल्लाहि तआला अलैह के ख़लीफ़ा सय्यदना मुहम्मद बिन मुबारक अल्वी किरमानी रहमातुल्लाहि तआला अलैह अपनी मशहूर किताब सैरुल औलिया, में तहरीर फरमाते हैं हज़रत सुल्तानुल मशाइख़ क़ुद्दसा सिर्रहू
महबूब ए इलाही ख्व़ाजा निज़ामुद्दीन औलिया देहेलवी रहमातुल्लाहि तआला अलैह ने फ़रमाया के चन्द शराइत के साथ महफ़िल ए सिमाअ हलाल है

*नं.1, सुनाने वाला मर्द कामिल हो, छोटा लड़का और औरत न हो,*

*नं.2, सुनने वाला याद ए ख़ुदा से ग़ाफ़िल न हो (यानी नमाज़ी परहेज़ ग़ार हो)*

*नं.3, जो कलाम पढ़ा जाये वो फ़हश बेहयाई और मसख़रगी न हो,*

*नं.4, आला ए सिमाअ यानी सारंगी मज़ामीर (यानी म्यूज़िक) वरबाब से पाक हो,*

*📚 सैरुल औलिया बाब 9. दर सिमाअ व वज्द व रक़्स. सफा 501)*

इसके अलावा सैरुल औलिया शरीफ़ में एक और मक़ाम पर है के एक शख्स ने हज़रत महबूब ए इलाही ख़्वाजा निज़ामुद्दीन औलिया रहमातुल्लाहि तआला अलैह से अर्ज़ किया के इन अय्याम (दिनों में) बाअज़ आस्ताना दार दुर्वेशों ने ऐसे मजमे में जहां चंग वरबाब मज़ामीर (यानी म्यूज़िक) था वहां रक़्स (यानी नाचना कूदना) किया,
तो हज़रत ने फ़रमाया के उन्होंने अच्छा काम नहीं किया जो चीज़ शराअ में नाजाइज़ है वो नापसन्दीदा है इसके बाद किसीने बताया के जब ये जमाअत
(यानी क़व्वाली सुनने वाले लोग) बाहर आई तो लोगों ने उनसे पूछा के तुमने ये क्या किया वहां तो मज़ामीर (यानी म्यूज़िक) थे
तुमने सिमाअ किस तरह सुना और रक़्स (यानी नाचना कूदना) किया उन्होंने कहा के हम इस तरह सिमाअ में मुस्ताग़र्क़ थे के हमें ये मालूम ही नहीं हुआ के यहां मज़ामीर (यानी म्यूज़िक) हैं या नहीं, हज़रत सुल्तानुल मशाइख़ ने फ़रमाया ये कोई जवाब नहीं इस तरह तो हर गुनाहगार हराम कार कह सकता है,

*📚 सैरुल औलिया, बाब 9. सफा 530)*

खुलासा ये है के आदमी ज़िना करेगा और कह देगा के में बेहोश था मुझको पता नहीं के मेरी बीवी है या ग़ैर औरत,
और शराबी कहेगा के मुझे होश नहीं शराब पी या शर्बत,
मज़ीद बर‌आं उन्हीं हज़रत सय्यदना महबूब ए इलाही निज़ामुलहक़ वद्दीन अलैहिररहमतुह वर्रिज़वान के मलफूज़ात पर मुस्तामिल उन्हीं के मुरीद व ख़लीफा हज़रत ख़्वाजा अमीर हसन अलाई सनजरी की तसनीफ

*अगली पोस्ट.....*



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