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मेरे ख्वाजा हिन्द के राजा6️⃣

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*🥀 मेरे ख्वाजा हिन्द के राजा 🥀*



*👉 पोस्ट नं. :➪ 06*

*࿐ _आईना-ए -अजमेर कुछ ऐसा अक्स दिखाता है ]_*
     *࿐ _ज़र्रा-ज़र्रा आशिक़-ए-ख़्वाजा नज़र आता है ]_*
       
 *⚘ हक मोईन या मोईन ⚘*
     
*मुकुद्दमा मौलाना मुहम्मद मीकाईल ज़ियाई*

◍◍➦‎ फिर नबिय्ये अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की विलादते बासआदत और एअलाने नुबुव्वत के बाद सरकारे ख़्वाजा गरीब नवाज़ कुद्दि स सिर्रुहू की इस मुल्क में तशरीफ आवरी से कब्ल अल्लाह के बहुत से मुरख्लिस बन्दे उलमा, फुज़ला, सूफिया, मुजाहिदीन, फातिहीन और मुबल्लिगीन अल्लाह की वहदानियत, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की रिसालत और इस्लाम की हक़़्कानियतो सदाकृत का पैगाम आमो ताम करने के लिए हिन्दुस्तान आए।

◍◍➦‎ गोया अरब में इस्लाम का सुरज तुलूअ होने के साथ साथ हिन्दुस्तान में भी उस की रौशनी फैली। मगरं सैय्यिदुल अंबिया फख्रे कौनो मकाँ सरवरे आलम सल्लल्लाहु, तआला अलैहि वसल्लम के हुक्म से जब हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ यहाँ तशरीफ लाए तो कुप्रिस्तान का नक़्शा ही बदल गया। याअनी मुल्क के गोशे गोशे, और चप्पे चप्पे में आप की तब्लीग, तालीम और तरबियत के उजाले फैल गए, कुफ्रो शिर्क की तारीकियाँ छट गई और इस्लामो ईमान की कृन्दीलें रौशन हो गईं। इसी लिए इस मुल्क को हज़रत आदम का हिन्दुस्तान होने के साथ साथ ख्वाजा का हिन्दुस्तान होने का शरफ भी हासिल है बल्कि इम्तेदादे ज़माना के सबब आम हिन्दुस्तानी इसे ख्वाजा का हिन्दुस्तान ही कहता, मानता और तस्लीम करता है!..✍🏻

*📚 सीरते ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ सफ़ह,26,*



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*🏁 मसलके आला हज़रत 🔴*

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मुई़नुद्दीन ह़सन सन्जरी या सिज्ज़ी

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 मुई़नुद्दीन ह़सन सन्जरी या सिज्ज़ी 🥀* _ह़ुज़ूर ख़्वाजा ग़रीब नवाज़, ख़्वाजा मुई़नुद्दीन चिश्ती अजमेरी رضی الله عنہ का इस्मे मुबारक *ह़सन* है, और आप का अस़्ल निस्बती लक़ब *“सिज्ज़ी”* है, न कि अ़वाम में राइज *“सन्ज़री”* - इसकी वजह येह है कि आप का तअ़ल्लुक़ इ़लाक़ह *“सिज्ज़”* से था, जो कि सिजिस्तान का मुख़्तस़र और सीस्तान का मुअ़र्रब है, और क़वाइ़दे अ़रबी के मुत़ाबिक़ इस की निस्बत *सिज्ज़ी* बनती है। मोअ़्तबर कुतुबे तारीख़ व तज़्किरह, जैसे मनाक़िबुल् ह़बीब, तहज़ीबुल् अस्मा वल् लुग़ात और मुअ़्जमुुल् बुलदान में स़राह़त के साथ सीन पर ज़ेर, जीम साकिन और आख़िर में नुक़्त़ह् दार ज़ (राए मुअ़ज्जमह) का ज़िक्र है। - *लिहाज़ा “सन्जरी” कहना या लिखना तह़क़ीक़ी त़ौर पर ग़लत़ है, और दुरुस्त “सिज्ज़ी” ही है।*_ *ह़ज़रत अ़ल्लामह क़ारी लुक़मान शाहिद स़ाह़ब क़िब्लह तह़रीराते लुक़मान के स़फ़्ह़ह नम्बर 523 पर लिखते हैं:* हिन्दुस्तान के मशहूर स़ूफ़ी बुज़ुर्ग ह़ज़रते ख़्वाजा मुई़नुद्दीन चिश्ती अजमेरी علیہ الرحمہ का नामे पाक ह़सन है, और अ़वाम व ख़वास़ आप को ह़सन सन्जरी कहते, लिखते हैं - आप...