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मेरे ख्वाजा हिन्द के राजा5️⃣

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*🥀 मेरे ख्वाजा हिन्द के राजा 🥀*



*👉 पोस्ट नं. :➪ 05*

࿐ _आईना-ए -अजमेर कुछ ऐसा अक्स दिखाता है ]_

     ࿐ _ज़र्रा-ज़र्रा आशिक़-ए-ख़्वाजा नज़र आता है ]_ 

   *⚘ हक मोईन या मोईन ⚘*
     
*मुकुद्दमा मौलाना मुहम्मद मीकाईल ज़ियाई*
      
◍◍➦‎ कदीम हिन्दुस्तान ( जिस में मौजूदा हिन्दुस्तान के अलावा श्रीलंका, बंगलादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान का मोअतदबेह हिस्सा शामिल था ) में इसलाम और मुसल्मानों का वुजूद सरकारे ख्वाजा गरीब नवाज़ सैय्यिद मुईनुद्दीन हसन चिश्ती सन्जरी रदियल्लाहु तआला अन्हु के दमक दम से है अगरचे अव्वलुलंबिया अबुलबशर हज़रत सैय्यिदुना आदम अलैहिस्सलाम का नुजूल हिन्दुस्तान में ही हुआ और इसी सरज़मीन पर अल्लाह वहदहू लाशरीक का नाम लेने वाले इनसान की तख़लीक और नश्वोनुमा का आगाज़ हुआ नीज़ अल्लाह तआला की वहदत, अज़मत और किब्रियाई का डंका बजाने वाले इसी मुल्क से दुन्या के मुख्तलिफ हिस्सों और गोशों में फैले और आबाद हुए मगर हज़रत आदम अला नबिय्येना व अलैहिस्सलातु वत्तस्लीम के बाद से नबिय्ये आखिरुज्ज़माँ खातमे पैगम्बरों सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम तक का अरसी हज़ारों साल पर तवील होने के सबब और बन्दगाने खुदा को राहे रास्त पर काइम रखने और उन की हिदायतो रहनुमाई के लिए दीगर अंबिया व रुसुल का वुरूदे मस्ऊद इस मुल्क में न होने की वजह से तौहीदो खुदा परस्ती के उजाले कुफ्रो बुतपरस्ती के अन्धेरों में तबदील हो गए थे नतीजे के तौर पर पूरा मुल्क कुफ्रो शि्क की आमाजगाह बन गया था।..✍🏻

*📚 सीरते ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ सफ़ह,26,*
     


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*🏁 मसलके आला हज़रत 🔴*

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मुई़नुद्दीन ह़सन सन्जरी या सिज्ज़ी

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 मुई़नुद्दीन ह़सन सन्जरी या सिज्ज़ी 🥀* _ह़ुज़ूर ख़्वाजा ग़रीब नवाज़, ख़्वाजा मुई़नुद्दीन चिश्ती अजमेरी رضی الله عنہ का इस्मे मुबारक *ह़सन* है, और आप का अस़्ल निस्बती लक़ब *“सिज्ज़ी”* है, न कि अ़वाम में राइज *“सन्ज़री”* - इसकी वजह येह है कि आप का तअ़ल्लुक़ इ़लाक़ह *“सिज्ज़”* से था, जो कि सिजिस्तान का मुख़्तस़र और सीस्तान का मुअ़र्रब है, और क़वाइ़दे अ़रबी के मुत़ाबिक़ इस की निस्बत *सिज्ज़ी* बनती है। मोअ़्तबर कुतुबे तारीख़ व तज़्किरह, जैसे मनाक़िबुल् ह़बीब, तहज़ीबुल् अस्मा वल् लुग़ात और मुअ़्जमुुल् बुलदान में स़राह़त के साथ सीन पर ज़ेर, जीम साकिन और आख़िर में नुक़्त़ह् दार ज़ (राए मुअ़ज्जमह) का ज़िक्र है। - *लिहाज़ा “सन्जरी” कहना या लिखना तह़क़ीक़ी त़ौर पर ग़लत़ है, और दुरुस्त “सिज्ज़ी” ही है।*_ *ह़ज़रत अ़ल्लामह क़ारी लुक़मान शाहिद स़ाह़ब क़िब्लह तह़रीराते लुक़मान के स़फ़्ह़ह नम्बर 523 पर लिखते हैं:* हिन्दुस्तान के मशहूर स़ूफ़ी बुज़ुर्ग ह़ज़रते ख़्वाजा मुई़नुद्दीन चिश्ती अजमेरी علیہ الرحمہ का नामे पाक ह़सन है, और अ़वाम व ख़वास़ आप को ह़सन सन्जरी कहते, लिखते हैं - आप...