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मेरे ख्वाजा हिन्द के राजा 04

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*🥀 मेरे ख्वाजा हिन्द के राजा 🥀*



*👉 पोस्ट नं. :➪ 04*

࿐ _आईना-ए -अजमेर कुछ ऐसा अक्स दिखाता है ]_

     ࿐ _ज़र्रा-ज़र्रा आशिक़-ए-ख़्वाजा नज़र आता है ]_ 

*तकमीले अर्ज़ मुसन्निफ के कलम से*

◍◍➦‎ इस मौके पर सरकारे ख़्वाजा गरीब नवाज़ कुद्दि स सिरुहू की सीरतो सवानेह पर मुश्तमल बहुत सी किताबों का मुतालआ करने का शरफ हासिल हुआ। 

◍◍➦‎ उर्दू ज़बान में तो चन्द ही किताबें सामने आई या फारसी किताबों के तर्जुमे और इस मौजूअ पर किताबें ज़ियादातर फारसी ज़बान में ही देखने में आईं मगर उन किताबों की इशाअत भी अब न होने की वजह से वह आम दस्तरंस से बाहर हैं और उर्दू ज़बान में जो किताबें हैं उन में दो एक के अलावा मुकम्मल और तफसीली सवानेहे हयात न होकर एक इजमाली सवानेही खाका से ज़ियादा हैसियत नहीं रखतीं। मैंने कोशिश की है कि उर्दू ज़बान में सरकारे ख्वाजा गरीब नवाज़ के हालाते ज़िन्दगी पर यह किताब इम्तियाज़ी और इन्फिरादी हैसियत की हामिल हो जो कारी के जौके मुतालआ की तसकीन का सामान फराहम कर सके, और सरकारे ख्वाजा गरीब नवाज़ से मुन्सलिक अकीदतमन्दों के जज़्बात और इश्को महब्बत की बेचैनियों को मज़ीद शोअला बदामाँ करसके। मैं इस जिद्दो जहद मे कामयाबी की किस मन्ज़िल पर हूँ इस का सहीह अन्दाजा इस के कारेईन और मुबस्सिरीन ही लगा सकते हैं मैं तो इतना जानता हूॅँ

•••➲ कि बारगाहे गुरीब नवाज़ मे अगर यह किताब मक्बूलियत का शरफ हासिल करले तो फिर किसी सनंद की मज़़ीद कोई हाजत नहीं और आसारो कराइन से उस बारगाह में इस की कुबूलियत का मुझे यकीन हो चुका है! *फल्हम्दुलिल्लाहि व लिरसूलिही अला ज़ालिका।..✍🏻*

*📚 सीरते ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ सफ़ह 25,26,*



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*🏁 मसलके आला हज़रत 🔴*
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मुई़नुद्दीन ह़सन सन्जरी या सिज्ज़ी

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 मुई़नुद्दीन ह़सन सन्जरी या सिज्ज़ी 🥀* _ह़ुज़ूर ख़्वाजा ग़रीब नवाज़, ख़्वाजा मुई़नुद्दीन चिश्ती अजमेरी رضی الله عنہ का इस्मे मुबारक *ह़सन* है, और आप का अस़्ल निस्बती लक़ब *“सिज्ज़ी”* है, न कि अ़वाम में राइज *“सन्ज़री”* - इसकी वजह येह है कि आप का तअ़ल्लुक़ इ़लाक़ह *“सिज्ज़”* से था, जो कि सिजिस्तान का मुख़्तस़र और सीस्तान का मुअ़र्रब है, और क़वाइ़दे अ़रबी के मुत़ाबिक़ इस की निस्बत *सिज्ज़ी* बनती है। मोअ़्तबर कुतुबे तारीख़ व तज़्किरह, जैसे मनाक़िबुल् ह़बीब, तहज़ीबुल् अस्मा वल् लुग़ात और मुअ़्जमुुल् बुलदान में स़राह़त के साथ सीन पर ज़ेर, जीम साकिन और आख़िर में नुक़्त़ह् दार ज़ (राए मुअ़ज्जमह) का ज़िक्र है। - *लिहाज़ा “सन्जरी” कहना या लिखना तह़क़ीक़ी त़ौर पर ग़लत़ है, और दुरुस्त “सिज्ज़ी” ही है।*_ *ह़ज़रत अ़ल्लामह क़ारी लुक़मान शाहिद स़ाह़ब क़िब्लह तह़रीराते लुक़मान के स़फ़्ह़ह नम्बर 523 पर लिखते हैं:* हिन्दुस्तान के मशहूर स़ूफ़ी बुज़ुर्ग ह़ज़रते ख़्वाजा मुई़नुद्दीन चिश्ती अजमेरी علیہ الرحمہ का नामे पाक ह़सन है, और अ़वाम व ख़वास़ आप को ह़सन सन्जरी कहते, लिखते हैं - आप...