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मेरे ख्वाजा हिन्द के राजा 01

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*🥀 मेरे ख्वाजा हिन्द के राजा 🥀*



*👉 पोस्ट नं. :➪​ 01*

_*📝सवालः* सरकार गरीब नवाज़ की इन्फिरादी शान बयान कीजिये ?_ 

*✍🏻जवाबः* जिस तरह नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आमद से कब्ल दुनिया में बेशुमार अंबियाए किराम व रसूलाने इनाम तशरीफ लाए मगर उनके हल्के और इलाके महदूद थे इस लिये उनकी तब्लीग और रुश्द व हिदायत के असरात भी महदूद रहे । लेकिन जब खातमुल अंबिया सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जल्वागरी हुई तो आप अल्लाह तआला की पैगाम रसानी का एक आलमी निज़ाम कायम फरमाया जिस के असरात पूरी दुनिया में मुरत्तब हुए और वह कयामें कयामत तक बाकी रहेंगे । 

बिला तशवीह सय्यिदुना सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रज़ियल्लाहु अन्हु से पहले हिन्दुस्तान में वेशुमार मुबल्लिगीने इस्लाम की आमद हुई और सभों ने अपनी अपनी हैसियत और बिसात के मुताबिक तब्लीगी कारनामे अंजाम दिये । सियासी , इल्मी , अमली और रूहानी हर मुमकिन तरीक़ए कार को अपना कर यहां तक कि अपने जानें गंवा कर अपनी ज़िम्मह दारियों से उहदा वर होने की जिद्दो जिहद की और इस में वह काफी हद तक कामयाब भी रहे मगर जब सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ के मुबारक कदम इस धर्ती पर आए तो आप के तब्लीगी मसाई के असरात हिन्दुस्तान के हर ख़ित्ते और गोशे ता पहुंचे ।

आप के खुलफा व मुतवस्सिलीन मुल्क के जिस हिस्से में पहुंच गए वहां इस्लाम का बोल बाला हो गया । कुफ्र.की तारीकियां काफूर हुईं और इस्लाम के उजालों का समुन्द्र मोजेज़न हो गया । आप से पहले मुतअद्दिद मुसलमान फातेहीन ने मुल्क के मुख़्तलिफ इलाकों पर कब्जा व इक़ितदार हासिल किया मगर आप की दुआओं की बरकत से पहली बार आप के अहदे मुबारक में देहली और अजमेर के ऐवानों में मुसलमानों की बाज़ाब्ता मुकम्मल हुकूमत का प्रचम लहराया । सीरुल औलिया के मुसन्निफ़ लिखते हैं कि इस आफ़ताव के तुलूअ होने ( ख्वाजा गरीब नवाज़ की हिन्दुस्तान में आमद ) से कब्ल पूरे हिन्दुस्तान में कुफ्र व बुत परस्ती का रिवाज आम था और हिन्द का हर सरकश “ अना रब्बुकुमुल आला " ( मैं तुम्हारा सब से बड़ा रब हूं ) का दअवा करता था और अपने आप को अल्लाह तआला का शरीक कहता था वह पत्थर , ढेले , घर , दरख्त , चौपायों , गाए और उन के गोबर को सज्दह करते थे और कुफ्र की तारीकी से उन के दिलों के ताले और भी मज़बूत हो रहे थे अहले यकीन के इस आफताब के मुबारक कदमों की बरकत से जो दर हकीकृत मुईनुद्दीन ( दीन के मुईन व मददगार ) थे इस मुल्क की तारीकी इस्लाम के नूर से जगमगा उठी ।

आप की निगाहे विलायत जिस पर पड़ जाती उस के दिल की दुनिया बदल जाती रहज़न आता रहबर बन जाता , कातिल आता मुहाफिज़ बन जाता , सरकश आता गुलाम बन जाता , काफिर आता मुसलमान बन जाता , फ़ासिक आता मुत्तकी बन जाता , दुशमन आता हाशिया बरदार बन जाता और जादूगर आता तो तायब हो कर आमिले कुरआन बन जाता । हिन्दुस्तान के सब से बड़े समाजी इन्कलाब का यह बानी एक छोटी सी झोंपड़ी में एक फटे पुराने तहबंद में लिपटा बैठा रहता था । पांच मिस्काल से ज़्यादह की रोटी कभी मयस्सर न आती लेकिन सूज़े दरूं की असर अंगेज़ी और निगाह की तिलिस्माती तासीर का यह आलम था कि एक नज़र जिस पर डाल देते उस की ज़िन्दगी से गुनाहों के जरासीम दम तोड़ कर फना हो जाते और मअसियत के सोते हमेशा के लिये खुश्क हो जाते 

*📚 सीरते ख्वाजा गरीब नवाज़*
_*📚 सुन्नी कुइज़ मेरे ख्वाजा हिन्द के राजा सफा, 4/5*_



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